अपनी आप की शक्ति को कभी भी किसी से कम न आंकें
तो आइये दोस्तों बिना देरी किये हुए शुरू करते हैं हमारा आज का शीर्षक जो हैं never underestimate yourself!!!
१. क्या आप भी अपने आप काम समझते हैं ?
२. क्या आपको भी ये शंका रहती हैं की मैं जो काम करूँगा वो सफल होगा की नहीं ?
३. क्या आप खुद को किसे के सामने रखने से डरते हैं ?
क्या आप कुछ संकोची स्वाभाव के हैं जो की अपने प्रश्न पूछने से हकलाता हैं सामाजिक जगहों पर !!!क्या आप वो हैं जो अपने शकल को छुपातें हैं सबके सामने की कोई भी आपको न देखले |
तो मैं हूँ आपकी दोस्त और आपके ऐसे ही प्रश्नों का जवाब दूंगी और ऐसे ही बातों का जवाब देने के लिए आप मुझे फॉलो करते रहिये |
never underestimate yourself क्या होता हैं ?
इसका मतलब यह हैं अपने आपको कभी नज़रअंदाज़ मत करना और या तो अपने आप को किसी से भी काम मत समझना | आप वो सब कर सकते हो जो संसार के सभी व्यक्ति कर सकते हैं | लोग भूल जातें हैं की भगवान् ने सबको एक अच्छी काबिलियत के साथ धरती पर भेजा हैं | और उसे हमें कभी भी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए |
बस लोग कभी कभी भूल जाते हैं की अपने आप को कभी किसी से भी कम नहीं समझना चाहिए | किसी से भी काम हमें अपने आपको नहीं आंकना चाहिए क्योकि धरती पैन ऐसे भी लोग हैं जो अपने कमजोरी को अपना ताकत बनाकर आगे के पथ पर चल रहे हैं |
पर आजकल जैसे परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं वैसे ही लोगो के स्वाभाव में बहुत से बदलाव आ गए हैं | जैसे की लोगो को पहचानने का मापदंड उनकी खूबसूरती,कपडा और आपभूषण हो गए हैं |
पहले दौर में भी यही सब था परन्तु उसमें ये साड़ी सोच कुछ कम ही शामिल थी पर जैसे जैसे समय का चक्र आगे बढ़ता गया वैसे वैसे लोगों के देखने का नजरिया भी अलग सा हो गया हैं | आज तो सब अंधे घोड़े की दौड़ में भागें जा रहे हैं | पर कही न कही ये जरुरी भी हैं क्योकि हमें भी तो आगे ही बढ़ना हैं पर इसका मतलब ये नहीं हैं की आप अपने आपको कम आंकने लगे |
इसी के चलते मैं आप सभी लोगो को एक कहानी से अवगत करने जा रही हूँ जिसका यथार्थ इस आर्टिकल के शीर्षक से ही जुड़ा!!!
तो आइये शुरू करते हैं अपनी कहानी !!!!
ये कहानी शुरू होती हैं एक स्कूल की बच्ची से जो अपने स्कूल में कक्षा १० वि में पढ़ रही थी| वह अपने आपको अपने क्लास के बच्चों से अलग मानती थी | लेकिन बस उसकी एक गलती थी की वो मोटी थी और थोड़ी सावली थी | देखिये दोस्तों मोटा होना कोई श्राप नहीं हैं |
हमें इस बात का भी अंदाजा नहीं हैं की वो किस परेशानी से जूझ रही हैं | क्लास के बच्चे हमेशा उसका मजाक उड़ाते थे की "तू तो कित्ती मोटी हैं और तू काली भी हैं |तू धरती पर बोझ हैं और तेरे माता पिता ने इस हाथी को कैसे पैदा कर दिया | "
लड़की इन सब बातों पैन ध्यान देकर बहुत उदास हो जाती थी | बहुत ही ज्यादा अपने आपको अकेला मानती थी | क्योकि स्कूल में उसका एक भी दोस्त नहीं था जो उसको सही से समझ सके और उसके साथ में खेले या फिर उसके साथ में बातें करे | वह हमेशा ऐसे ही अपने आपको काम आंकने लगी थी |
उस लड़की को अपने माता पिता का नाम रोशन करना था | वह आगे जाकर कुछ अच्छा बनना चाहती थी | परन्तु उसके पिता ने यह कह दिया था की -"अगर तू १० वि में पहली नहीं आयी तो मैं तुझे आगे नहीं पढ़ने दूंगा |" क्योकि वैसे भी उसके पिता की आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं थी |
पर लड़की को तो आगे जाकर डॉक्टर बनना था| फिर वह एक दिन उदास होकर नदी किनारे जाकें बैठ गयी | जो उसके स्कूल के पास था | नदी बहुत ही शांत थी और उसकी आवाज़ लड़की को बहुत ही ज्यादा पसंद आती थी |
उसी के चलते नदी के पास उसने देखा की दूसरे छोर पर कुछ लोग एक काला पत्थर को उठके ले जा रहे थे क्योकि उन्हें उससे शिवलिंग बनाना था | वह बहुत ही गोल और चमकदार था | पानी में बहते बहते घिसतें घिसते वह एकदम चिकना हो गया |
और मंदिर में चढ़ाने के लायक हो गया | तो देखा आपने अगर आप चाहे तो कुछ भी असंभव नहीं होता ऐसे ही पत्थर की तरह आप भी संघर्ष करेंगे तो आपको भी एक दिन वो सब प्राप्त होगा जिसे आप चाहते हैं |
अब लड़की को उसके सारे सवालों के जवाब मिल गए | वह जान गयी की अगर में ही अपने आपको ऐसे ही अच्छे से पढाई में बनाऊ तो मेरी रूप को कोई नहीं देखेगा | सब मेरे छमताओं को ही देखेंगे और में भी अपने पिताजी का रोशन कर पाउंगी |
मेरे अंदर भी वो कार्य करने की छमता हैं | उसके बाद लड़की ने अपनी छमता पर संका न करते हुए अच्छे से पढाई की और अपनी कक्षा में पहली आयी | तो देखा दोस्तों आपने की कैसे एक छोटी सी लड़की डर भगाके आगे आयी और उसका सामना ही नहीं किया वरन उसे अपने निर्धारित स्थान तक भी पहुंचाया |
इसलिए मित्रों परिस्थियाँ से नहीं वरन अपने आपको कभी भी किसी से कम मत समझे क्योकि आपके अंदर भी कुछ कर गुजरने की छमता हैं !!!!!
पर आपको हमेशा ये बात याद रखनी चाहिए की जो आपसे छोटा हैं किसी भी चीज़ में जैसे की वो बल से भी हो सकता हैं ,या फिर ज्ञान से भी ,या फिर पैसे से भी तो हमें उनका कभी निंदा नहीं करनी चाहिए वरन उसे उस खामियों को पूरा करने के लिए साहयता करनी चाहिए | तो आज हमने सीखा की हमेशा अपने आपको अमूल्य मानना चाहिए |
आशा हैं आप लोगों को ब्लॉग पसंद आया होगा ऐसे ही मोटिवेटिंग विचार पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो करे |
