आप सभी को मेरा प्रणाम मैं आपकी दोस्त रानी फिर से हाज़िर हूँ एक कहानी लेके जिसका लेना देना मेरे बीतें हुए वक़्त से हैं जो मुझे अभी तक बखूबी याद हैं एकदम अच्छी तरह से तो बिना समय खर्च किये आइये मैं आपको सुनाती हूँ वो कहानी -👇👇
वह पहुंचने के बाद हमने अच्छा खाना खाया और बहुत सारे फल खाएं | दो तीन दिन के आराम करने के बाद अब बारी थी की मैं अपने चाचीजी के घर जाऊ जो वहा से तक़रीबन २० से २५ किलोमीटर दूर था | अब हम लोग ने अपनी स्कूटी पकड़ी और पेट्रोल भरते भरते, रास्तें पैन हौले हौले चलते वह पहुंच गए |
अब यहाँ से बात शुरू होती हैं मेरे डर की | जब हम निकले थे तब सब ठीक था पर अचानक रास्तें मे एक गांव आया जहा पे हमारी स्कूटी ख़राब हो गयी और करीबन साढ़े पांच बाच गए थे | और हम पेट्रोल भरवाकर जैसे ही उस गांव से निकले उसी वक़्त भयंकर बिजली कड़कनी शुरू हो गयी और रात होनी शुरू हो गयी |
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२ कहानियां जो मेरे से जुडी हुई हैं उसका जिक्र मैं कर रही हूँ |
ये कहानी हैं तब की जब में आठ या नौ साल की होंगी | तब अक्सर में आपने सहर से दूर दो दिन का सफर तय करके अपने चाचाजी के घर घूमने जाया करती थी | तो ऐसे ही एक बार अपनी गर्मियों के छुट्टियों में मैं वहाँ गयी | करीब दो दिन का ट्रैन का सफर होता हैं वो |
वह पहुंचने के बाद हमने अच्छा खाना खाया और बहुत सारे फल खाएं | दो तीन दिन के आराम करने के बाद अब बारी थी की मैं अपने चाचीजी के घर जाऊ जो वहा से तक़रीबन २० से २५ किलोमीटर दूर था | अब हम लोग ने अपनी स्कूटी पकड़ी और पेट्रोल भरते भरते, रास्तें पैन हौले हौले चलते वह पहुंच गए |
वहा पे हमने सोयाबीन की सब्जी खायी और बड़े बड़े कुआ देखे, आइसक्रीम भी खायी और थोड़ी शरारत और थोड़ी मस्ती भी की |अब वक़्त था वह से विदा लेने का और जैसे की तय था की शाम चार बजे निकल जायेंगे हुए दो घंटे में घर वापिस आएंगे उसी हिसाब से हम वहा से निकल गए | 😊
डर इस बात का था की रात हो गयी तो हम कहा रुकेंगे क्योकि वो जंगली इलाका था | बस फिर क्या होना था हमारी गाड़ी अचानक रुक गयी और आस पास सिर्फ जंगल ही जंगल | हम घबरा गए थे | तभी अचानक से एक आदमी आपने बेटे के साथ आया और उनका बीटा मैकेनिक था |
उसने हमारा इंजन ठीक किया और हम वहाँ से जल्दी घर लौट आये | 😢😢😢
परन्तु इन सबके बीच हमने विश्वास को काम नहीं होने दिया और हर वक़्त भगवन को याद करते रहे |
इसलिए अपनी हिम्मत कभी नहीं खोनी चाहिए चाहे मुश्किल कित्ती भी बड़ी क्यों न हो 😇😇😇😇
ये उस समय की बात हैं जब ठंडियों की छुट्टियां थी | मेरे सारे फ्रेंड्स छुट्टियों को बहुत ज्यादा एन्जॉय कर रहे थे | तो मैंने सोचा की मैं क्यों पीछे हटू | मुझे भी कही जाना था सर्दी के मौसम का मजा लेने | सब लोग राज़ी हो गए और हम लोगों ने प्लान बनाया की हम सब मसूरी जायेंगे |
तो उसके बाद क्या था हम सबने एक किराये करके गाडी ली | सबने अपने अपने बातें का योगदान दिया | उसके बाद सुबह हमें टाइम दिया हुआ था की हमें ७:३० बजे निकलना हैं पर कुछ स्नैक्स वगेरा लेने की वजह से हम लोग बहुत ही ज्यादा लेट हो गये |
हम लोग नौ बजे निकले सुबह के और हमें ड्राइवर ने चेतावनी दे दी थी की अगर हम लेट जायेंगे तो हर जगह वह पर नहीं घूम पाएंगे | पर हमने भी कहा देखा जायेगा जो होगा एक बार वहाँ जाये तो सही पहले | हम भी निकल पड़े अपने बस में गाना गाते हुए और गुनगुनाते हुए | पर जैसे जैसे ऊपर जाने लगे वैसे वैसे घबराहट का दौर शुरू हो गया |
पहाड़ों के पास जाकर बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन दर भी लग रहा था क्योकि बस बहुत ऊंचाई पैन थी | हमारी बस हिलोरें खा रही थी | ड्राइवर के मुताबिक हमने बहुत सारी जगह घूमें पर अब बारी थी की हम मसूरी जाएं | मतलब और ऊपर पहाड़ों के पास |
पर यहां से मेरे डरने का सिलसिला शुरू हो गया था | क्योकि खाई दिख रही थी और सकरा सा रस्तान था जिसमें हमारी बस चल रही थी | अब लगभग एक घंटा हो गया था हमें बस में बैठे हुए | और ऊपर जा ही रहे थे | वहाँ पैन खाई से सटे हुए होटल थे और भी बहुत सारे घूमने वाली जगह थी |
पर असल जगह पैन पहुंचने तक हमें ७:३० हो गया था | बहुत दर लग रहा था क्योकि रात हो गयी थी | और अब वहाँ घूमने वाले लोग भी घर लौट रहे थे | जिस काम के लिए हम लोग गए थे वो तो हुआ ही नहीं हैं | अब वहाँ बाहर भी बहुत ठण्ड थी | लेकिन रात हो गयी थी और अब ठण्ड बढ़ रही थी |
अब सबने सोचा की घर चलना चाहिए | वह से हम नीचे आने लगे रात का समय था बहुत ही डर लग रहा था | पर अभी भी बहुत हिम्मत की जरुरत थी क्योकि अभी भी घर पहुंचने में टाइम था | पर सबके साहस से मुश्किल सफर पार हो गया और हम अपने घर पहुंचने वाले थे |
उस समय हम लोगों को बहुत भूख लगी तो हम लोगों ने बस को ढाबा पैन रुकवाया | वहाँ हमने पेट भरकर खाना खाया | फिर अपने घर पैन पहुँच गए सही सलामत | तो देखा आपने कैसे हमने दर का सामना किया और मन में विश्वास रखकर सारी मुश्किलें पार कर ली |
तो देखा दोस्तों आपने मेरे दोनों कहानी से की मेरे रास्तों में कभी डर आया ,तो कभी मेरेको ये लगा के कुछ हो जायेगा | पर उस समय में भी मैंने साहस का परिचय दिया और हसी खुसी सारी बाधाओ को पार किया |
सीख
जीवन से ये उम्मीद न रखे की वोह हमेशा हमें रह दिखायेगा ,कुछ रास्तें ऐसे होते हैं जिसमें हमें अकेले ही चलना पड़ता हैं |
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