छोटी छोटी प्यारी पोयम्स सफलता से जुडी हुई आज मैं आप सभी को अपनी स्वरचित कविता से अवगत करने कराने जा रही हूँ जिसका शीर्षक कुछ इस प्रकार हैं जो आपको आपके जीवन में सक्सेस के प्रति अत्यधिक मोटीवेट करेगा !!!
देखिये जिंदगी का सफर काटों से भरा हुआ हैं अगर आप इस्पैन खरा नहीं उतर पा रहे हैं | तो आपका जीवन व्यर्थ हैं | हमें हमेशा अपने जीवन का एक लक्ष्य साधना होगा और उसी के हिसाब से अपना काम करना होगा | कभी भी अपने आपको कमजोर महसूस न करे |
चाहे मंज़िल कित्ती भी मुश्किल हो पर हमें हिम्मत रखनी हैं और सबको यह दिखाना हैं की हम किसी से कम नहीं हैं हमारे सामर्थ्य पे कोई शक न करे |
मोटिवेशनल पोयम्स क्या होते हैं ?
पोयम्स कहते हैं छोटे छोटे मोती जैसे अक्षर को जिससे एक साथ गुथकर एक अच्छा सा आकार देकर एक लय में पंक्तिबद्ध करके अच्छे से पिरोया जाता हैं | जहा शब्दों से ज्यादा भाव प्रकट किये जातें हैं | और लोग अच्छे से अपनी मन की वेदना भी कह जातें हैं |
इससे अच्छा तरीका नहीं माना जाता अपने अंदर की भावना को व्यक्त करने का | और इसलिए बड़े बड़े कवित्री या बड़े बड़े लेखक हुए हैं वह ज्यादातर अपने पद्द में कविता का इस्तमाल ही करते हैं |यह आपको समझ में आएगा की असली मोटिवेशन क्या होता हैं | इसलिए मैंने भी यही तरीका समझा अपने भाव को प्रकट करने का | तो आइये शुरू करते हैं स्वरचित कविता दोस्तों !!!!
ऐ मुसाफिर तू चलता जा |
अपने कर्म करता जा |
राह में काटें आएंगे तेरे
तू फूल बिछाता जा |
रोना नहीं हैं तुझे कभी
हसी का पैगाम हैं तू अभी
वक़्त का पैय्या चलता हैं |
कभी दुःख भी मिलता हैं
पर मुसाफिर तू चलता जा
अपने कर्म करता जा |
सोने को हराना हैं तुझे
अपने सपने सजाने हैं तुझे
फ़िक्र कर लक्ष्य के होने की
छोड़ दे जिद कुछ खोने की
ऐ मुसाफिर तू चलता जा
अपने कर्म करता जा |
पिंजरा खोल तू अपना
हिचक को छोड़ता जा
ऐ मुसाफिर तू चलता जा
अपने कर्म करता जा |
अर्थ
तो चलिए जानतें हैं की असल में इस कविता का असली मतलब क्या हैं ?
इसमें एक आदमी का चित्रण किया गया हैं जिसे एक मुसाफिर कहा गया हैं जो बहुत ही थका हुआ हैं और अपने काम से परेशान है और अब चाहता हैं की वो आराम कर ले | पर वो एक बात से बहुत ज्यादा परेशान हैं की जो वो कर रहा हैं वो सही हैं या नहीं | पर अब यह पर लेखक जो उस मुसाफिर का हमेशा पथप्रदर्शक कर रहा हैं|
वह कह रहा हैं की ऐ मुसाफिर तू चलता हैं अपने कर्म करता जा मतलब वो कहना चाहा रहा हैं की तू बिना फ़िक्र के अपने कार्य पैन ध्यान दे और ये मत सोच की वो सफल होगा या नही | फिर लेखक कहता हैं की तू अपने राह पैन आने वाले काटों से मत डर मतलब अपने राह में आने वाले मुसीबतों से मत दर | बस अपने अंदर हौसला रख के एक दिन तुझे तेरा लक्ष्य मिल के रहेगा |बस तू अपना कर्म कर न की चिंता |
फिर बोला हैं की तू अपने राह में फूल बिछा मतलब समस्या समाधान उसे छोटे छोटे टुकड़ो में तोड़कर सुलझाने की कोशिश कर नाकि हार मानके बैठ जा | फिर बोलते हैं की हमेशा खुश रहा कर क्योकि एक खुसी का पैगाम हैं तू | तुम्हे अपने नींद को हराना होगा और दिन रात मेहनत करना होगा |
समय तो लगेगा पर तुझे हार नहीं माननी हैं | समय एक बहुत ही कीमती धन हैं जिसे हम नहीं को सकते | आपको हमेशा ही समय के साथ सुधरने का प्रयास करना हैं और हमेशा ही समय का उपयोग करना हैं और हमेशा हर मोड़ पर जो हो रहा हैं उससे सीख भी लेना हैं |
सोना तो जिंदगी भर हैं पर मौक़ा हमेशा नहीं आता फिर लेखक उस मुसाफिर को कहता हैं की पहले तुझे अपनी सारी इच्छाओं को सजाना होगा | तब जाके तुझे सफलता का पथ दिखेगा फिर तू कुछ अच्छा कर पायेगा |
फिर लेखक यही बोल रहे हैं की तू कर्म करता जा | जो काम कर्रा हैं उसे में ही उसे सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर नाकि निराश हो के बैठ जा | फिर लेखक कहता हैं की तुझे अभी और आगे जाना हैं | अपना पिंजरा खोल तू हिचक का मतलब जहा पैन भी तू संकोच में हैं की तू सही हैं या नहीं या फिर तुझे दुःख हो रहा हैं |
अपने आपको एक आज़ाद पंछी की तरह उड़ने दे और आसमान की उच्चयिओं को छूने दे ताकि तू हर वो मुकाम हासिल कर सके जो सब करते हैं अपनी मेहनत के दम पे |
सारांश
तो अब सुनते हैं की असल में लेखक कहना क्या चाहते हैं | लेखक कहना चाहते हैं की आप अपने आपको ऐसा न समझे की आप जिंदगी में कुछ भी नहीं कर सकते | वो आपका मार्गदर्शन कर रहे हैं और आप लोगों को ये बताना चाह रहे हैं की आप अपने लक्ष्य पर की अडिग रहे |
इधर उधर न भटके | और कोई सी भी परेशानी या मुस्खिल आये आपको हमेशा मुस्कुराते रहना हैं | हर समस्या को बिना चिंता के ही दूर करना हैं | अपने संकोची स्वाभाव को छोड़ देना हैं | व्यर्थ के कामों में नहीं पढ़ना हैं जिससे आपका समय बर्बाद हो और हमेशा सत्य के पथ पर अग्रसर रहना हैं |
अपने सोच को बड़ा करना हैं जिससे मन के अंदर हो रही वेदना पूरी जगत को प्रवाह हो पाएं | ज्यादा सोचने में समय को बर्बाद नहीं करना हैं और पूरी निष्ठा और लगन से हर कार्य को करना हैं | "फतह उनकी ही होती हैं जनाब जो किस्मत पैन यकीन न करके अपने मेहनत पैन यकीन करते हैं "|
तो दोस्तों ये हैं मेरी स्वरचित कविता आशा हैं आप सभी को पसंद आया होगा | इसका शाब्दिक अर्थ हैं की ऐ मनुष्य तू अपना कर्म करता जा फल की चिंता मत कर बस तू अपना कर्म करते जा | ऐसे ही मोटिवेशनल पोयम्स मुझे फॉलो करे | 👇👇
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