"टीचर्स डे बनाने के पीछे की असली सच्चाई "

 आप सभी को मेरा प्रणाम दोस्तों !!!और मैं हूँ आपकी दोस्त रानी | 💓💓लेके फिर हाज़िर हूँ   आर्टिकल  इन माय स्टाइल !!!तो बिना कोई देर किये अपने टॉपिक के ऊपर डिसकस करना शुरू करते हैं !!!

जैसे की आप लोगो ने शीर्षक तो देख ही लिया होगा | जिसमें हम टीचर्स डे के बारें में डिसकस करेंगे !!!तो आइये बिना देरी के शुरू करते हैं !!इस आर्टिकल में जिस चीज़ में हमारा ध्यान रहेगा वो कुछ इस प्रकार हैं | 👇👇

१) हम टीचर्स डे क्यों बनाते हैं ? 👈

२)स्कूलों में टीचर्स डे कैसे सेलिब्रेट करते हैं आज कल के बच्चे ?

३)शिक्षक दिवस मनाने  का असली रीज़न क्या हैं ???




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१) हम टीचर्स डे क्यों बनाते हैं ? 👈

तो चलिए शुरू करते हैं !!!शिक्षक दिवस आमतौर पर ५ सितम्बर को डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मतिथि के अनुसार बनाया जाता हैं | जैसे की हम सब जानतें हैं टीचर्स डे के सेलिब्रेशन के पीछे की कहानी कुछ और हैं !!इस दिन मुख्यतः स्कूलों के बच्चे अपने शिक्षक को पुष्प ,तोफा चीज़ें लातें हैं और उनके लिए पोएम ,निबंध भी बोलते हैं |

बहुत खुशी का माहौल होता हैं | असल में टीचर्स डे  उद्देश्य थोड़ा भिन्न होता हैं | हम रोज़ स्कूल जातें हैं और वो हमें पढ़ाते भी हैं | पर कभी कभी क्या होता हैं की समय ही नहीं मिल पाता हैं बच्चों को अपने टीचर के साथ | और वो उनके बारें में फील करते हैं उसे बोल नहीं पातें हैं सही से इसलिए हम इसी चीज़ को उनसे साझा करने के लिए टीचर्स डे बनाते हैं | 

और अपने दिल की सारी  बातें  उनके सामने रखते हैं | तो जिसमें हमारे टीचर्स भी हमारी परिपूर्ण भागीदारिता देते हैं और हमें वो बहुत  आशीष भी देते हैं जिससे हमें बहुत ही ज्यादा मोटिवेशन मिलता हैं | और उनकी तरह बनने का हौसला मिलता हैं | तो चलिए इसी सन्दर्भ में आपको एक कहानी सुनाई जाएं जो एक बच्चे के सच्ची परिश्रम पैन आधारित हैं -तो कृष्णा नाम  का एक लड़का रहता था बहुत पहले | 

वह पढ़ने में बहुत ही अच्छा था पर उसके माता पिता बहुत ही गरीब थे तो अपने बच्चे को पढ़ने के लिए बहार नहीं भेज पातें थे | बाकि उसके कक्षा के सारे बच्चें बहुत टूशन पड़ने जाया करते थे पर वो बेचारा घर में ही पढ़ा करता था कुछ कुछ चीज़ों में वह बहुत ही कमजोर था | 

इसी वजह से जिस सब्जेक्ट में वो कमजोर था उसमें उसके कम अंक आया करते थे | तो एक दिन उसके शिक्षक ने  पूछ ही लिया की आखिर  तुम्हारें अंक काम क्यों आते हैं | तो उसने सारी सच्चाई बता दी | फिर उसके शिक्षक ने उसे खुद टूशन पढ़ाना शुरू कर दिया | वो दिन रात मेहनत करता था और फिर १०वी की परीक्षा भी आने वाली थी | तो उसने सैंपल पेपर भी सुलझाने शुरू कर दिए | 



और हर बार वह अपनी कॉपी अपनी टीचर से करवाता था ऐसे ही उसने बहुत सारे सैंपल पेपर सुलझा लिए और अब समय आ गया पेपर का | उसने बहुत अच्छे से पेपर दिया और १०वी में उसने अच्छे से स्कूल टॉप किया | यह सब उसके शिक्षक की वजह से ही हुआ | 

तो देखा दोस्तों आपने इसलिए भगवान् को गुरु का दर्जा दिया हुआ हैं |  इसलिए आपको हमेशा अपने इज़्ज़त करनी चाहिए और हमेशा उनके नेकी वाले पथ पर चलना चाहिए | इसलिए हमारे पुराणों में भी गुरु को  भगवान् का दर्जा दिया हुआ हैं | 

ऐसे ही कहानी एकलव्य और उनके गुरु की भी कहानी थी जिसमे उन्होंने अपने गुरु की विद्या को छुपकर सिख लिया था और उनकी मूर्ति बनाकर भी ज्ञान ले रहे थे| ऐसे ही कहानी करण और उनके गुरु की भी थी जब उनके गुरु  विश्राम कर रहे थे तो करण ने उनसे भेद छुपाया था की वो एक छत्रिया हैं और इसलिए उनको भी श्राप मिला था | 

पर उन्होंने कभी अपने गुरु की आज्ञा का निरादर नहीं किया था | तो हमें ऐसे ही शिष्य बनना हैं जो अपने गुरु का आदर करना न छोड़े |  

                              

२)स्कूलों में टीचर्स डे कैसे सेलिब्रेट करते हैं आज कल के बच्चे ?

तो चलिए अब बात करते हैं आज की जो जनरेशन वो कैसे सेलिब्रेट  करती हैं टीचर्स डे को |  सारे बच्चे इससे पहले से ही खूब तैयारिओं में जुटे रहते हैं !!!उनकी खुसी चरणसीमा पैन होती हैं | कुछ-कुछ स्कूलों में तो १२वी के बच्चे ही टीचर बनकर आते हैं और वो ही बच्चो को पढ़ाते हैं | 

वह पूरा दिन शिक्षक को समर्पित होता हैं !हमारे स्कूल में भी हम बहुत सारे तरीको से आपने टीचर्स के लिए प्प्रोग्रम्मेस  की तैयारी करते थे | लास्ट में हमारे प्रिंसिपल सर भी हमारी बहुत तारीफ़ किया करते थे और हमें भी रीटर्न  गिफ्ट मिला करते थे !!!

तो दोस्तों ये तो हो गया वो सेलिब्रेशन जो हम ५ सितम्बर को करते हैं बस !!!और ये सारे चीज़ें तो बाहरी हैं !!अब बात करते हैं असली कारन सेलिब्रेट करने का !!😄😄😄

जैसे की हम सभी जानतें हैं माता पिता से भी आगे हमारे गुरु का स्थान होता हैं !!!गुरु और शिष्य का नाता तो जन्मोजन्म का हैं और एक दिन से हम इनके नाते को बता नहीं सकते हैं | इस दिन का असली मतलब यह हैं की हम अपने गुरु के पदचिन्हो पैन उनके दिखाएं हुए रास्तों  पैन चले | 

और उनके द्वारा दिखाएँ हुए रास्तों से हम कामयाबी को हासिल करे  | उनके देखे हुए सपनों को पूरा करें | ये सिर्फ एक दिन तो हमारे कर्तव्यों को याद दिलाने वाला हैं | उनका संशमरन का दिन हैं | आईए इसी सन्दर्भ में मैंने एक कविता लिखी हैं छोटी सी -😇😇





गुरु की शरण में जो आया हैं | 

उसने स्वर्ग-परलोक धाम इस जन्म में पाया हैं | 

मन करना गुरु का तुम हमेशा !!

उनके समान नहीं इस दुनिया में दूजा !!!

ऐसे गुरु को करें हम नमन !!

याद रखे उनका एहसान जन्मो जनम !!

तो चलिए दोस्तों अब जाने का वक़्त आ गया हैं पर हम मिलते रहेंगे कुछ नए कहानियों  के साथ  !!!✋✋✋

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