आप सभी को मेरा प्रणाम मैं हूँ एक मार्गदर्शक जो हमेशा उपस्थित रहता हैं आप लोगों की जिंदगी की परेशानी को सुलझाने के लिए | तो ये आर्टिकल वो विद्यार्थियों के लिए हैं जो अपने आपको कम समझते हैं तो उनके लिए ये एक मोटिवेशन हैं जिसमें हम बहुत सारे विषयों पर बात करेंगे | तो हम इन् सारे विषयों के बारें में नीचे चर्चा करेंगे | 👇👇👇
हर समय क्या होता हैं की आजकल खूबसूरती की परिभाषा बदल गयी हैं हर समय जब भी कोई अपने आपको आयने में देखता हैं तो उसे लगता हैं की में अगर सुन्दर हो जाएँ तो मैं बहुत सफलता पा लूंगा | और अपने आपको उसी हिसाब से अंक देने लगते हैं लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता हैं की सफलता को कोई मुखौटे की आवश्यकता नहीं होती | इसकेलिए आपका अच्छा स्वाभाव ,एक अच्छी व्यक्तित्व और एक निःसंदेह कार्य की आवश्यकता होती हैं |
तो मैं आपको लोगों को एक कहानी सुनाने जा रही हूँ जहाँ पैन में बताउंगी की कैसे एक राजा को उसका सही उत्तराधिकारी मिला और इससे आपको अपने जीवन में शीशा को देखकर कैसे मोटिवेशन लेना चाहिए |
लेकिन ये बात ध्यान रखे की सफलता आपको एक अलग की रूप से निखरती हैं जिससे आपको स्वाभाव,आपकी मेहनत ,आपकी समझदारी और भी बहुत सारी निखर के आती हैं |
इसी के लिए मैं आपको एक कहानी बता रही हूँ |.....
दर्पण -एक पथप्रदर्शक कहानी
कैसे होगा दर्पण से पथ प्रदर्शन ?
तो आइना एक ऐसा चीज़ हैं जिसे हम अपने जिंदगी में अधिकतर देखते हैं और ऐसा कोई घर नहीं होगा जहाँ पैन आइना न हो | हर कोई अपना चेहरा देखकर कभी खुस होता हैं तो कोई बहुत ज्यादा दुखी हो जाता हैं अपने अक्स देखकर की वो कैसे दीखते हैं | लेकिन मेरे दोस्तों ऐसा कुछ नहीं हैं की अगर आप सुन्दर नहीं हैं तो आपके लिए सफलता के सारे द्वार बंद हो गए ऐसा होता नहीं हैं |
लेकिन आप कैसे दीखते हैं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता दोस्तों | और आज के युवा इसी जाल में फसते जा रहे हैं और आपको सुन्दर बनाने का प्रयत्न कर रहे | लेकिन आपने एक बात जानने की कोशिश की हैं की जो ये आइना हैं सत्य बोलता हैं और जैसे आप हो वैसे ही आपको अक्स दिखता हैं तो अपनी कहानी खुद लिखी हुई को शुरू करते हैं जो आपको बहुत अच्छी लगेगी |
तो चलिए शुरू करते हैं......
खुद से लिखी हुए कहानी।👇👇👇👇
और वह प्रकृति अपना खुद गाना गाया करती था | लेकिन यहाँ पैन एक बात अच्छी नहीं थी की जो राजा था उनका कोई बच्चा नहीं था | तो उनकी भी कामना थी की उनका भी एक प्यारा सा बच्चा हो | एक दिन एक प्यारी सी परी रानी की सपनो में आयी और उसे बोला की -"जल्द ही तुम्हे तो पुत्रों की प्राप्ति होगी "| जैसे की परी था उनको समय बाद पुत्र रत्न प्राप्ति हुई थी |
और महाराज के राजमहल में सभी बहुत खुस थे और उनकी प्रजा भी बहुत ज्यादा खुश थी और जैसे जैसे समय बीत रहा था वैसे वैसे दोनों बहुत सुन्दर और हैंडसम होते | जो राजा होता हैं वो बहुत असमंजस होता क्योकि उसे ये समझ नहीं आ रहा था की किसे राज्य का उत्तराधिकारी बनाएं | राजा के दो पुत्र थे जिनका नाम शांतनु महेश था | राजा जानतें थे की शांतनु एक अच्छा राजा बनेगा पर उन्हें इस डर था अगर मैंने कर दिया तो महेश दुखी हो जायेगा | तो उन्होंने सोचा की दोनों बच्चों की परीक्षा ली जाएँ |
तो पिता ने दोनों बच्चों को एक कार्य दिया की तुम दोनों को एक महीने तक जंगल रहना हैं बिना अपनी पहचान बताएं | तो उनके पिता की आज्ञा से दोनों जंगल की ओर चल दिए | कुछ दूर अंदर तक चलते हुए | रास्तें में बहुत आंधी तूफ़ान चलने लगे | जिस वजह से दोनों भाई अलग और रास्ता भटक गए |
बिछड़ने के बाद,दोनों जुड़वाँ कुमार अलग अलग जगह पर पहुंचे |जो शांतनु था पंहुचा एक छोटी सी झोपड़ी के पास और वहा पैन एक चिडचिडी बुढ़िया रही थी | जब शांतनु से पूछा की में यह रह सकता हूँ तो उस बुढ़िया ने पहले तो मना कर दिया पर बाद में मान भी गयी पर उसकी एक शर्त थी की वो वहाँ रह सकता हैं अगर वो उसकी हमेशा मदद करेगा खाना इक्कठा करने में ,कुए से पानी और घर के बहुत सारे कामों में मेरी मदद करनी होगी | आखिर शांतनु को घर चाहिए था तो वो मन गया और और बुढ़िया की सारी बात मानने के लिए तैयार हो गया |
जैसे जो जो बुढ़िया ने बोला शांतनु वह सारी बातें मानता रहा | और दूसरी तरफ उसका भाई महेश एक साधारण से किसान के पास पंहुचा और उसके विनती करने पर वह किसान उसे घर पैन रखने के लिए मन गया और कहा की तुम अपना खर्चा खुद उठाना | और अंत में किसान ने ये भी कहा की तुम्हे हम लोगों के साथ किसानी भी करनी होगी | तो वो फिर से मान जाता हैं क्योकि उसे भी तो एक महीने रहने के लिए एक घर की ही तालाश थी |
जैसे जैसे समय बीत रहा था उनके एक महीने पुरे होने को आये थे | अब शर्त के अनुसार उनके पिता ने पहले ही बता दिया था की आप महीने के बाद उनके राजभवन में मिलना था | और उन्होंने ये भी कहा था की इस उपरांत तुम्हारे किये हुए कार्यों का आंकलन करके ही मुझे पता चलेगा की कौन बनेगा मेरे राज्य का वारिस होगा आने वाले समय में | और इन एक महीने में जो भी तुमने किया हैं वो सब जादुई आईने की मदद से देख सकते हैं |
तो जब वह दोनों राजमहल पहुंचे तो उनके पिता अपने गर्व महसूस कर रहे थे की मेरे दोनों राजकुमार तक अपनी पहचान छुपाके रह लिए अकेले जंगल में | अब बात थी की जादुई आइना की मदद से देखा जाएँ की उन्होंने वह जाके क्या क्या किया हैं | तो पहले बारी आयी शांतनु की वह दर्पण के सामने जाके खड़ा हो गया और राजा ने आदेश दिया की दर्पण विश्तार से बताओ | और दर्पण ने दिया की कैसे शांतनु के भोलेपन वाले स्वाभाव ने उस बुढ़िया पिघला दिया और वो बुढ़िया उसे १५ के अंदर ही अपने बेटे की तरह प्यार करने लगी |
और दूसरी तरफ जब आइना ने महेश की असलियत दिखाई तो सब दंग रह गए क्योकि किसान के घर में रहने के बाद वह दो तीन दिन तक काम किया उसका बाद उसने काम करने से मना दिया| और वो उस किसान से भी अच्छे से बात नहीं करता था | दोनों जानते थे की कौन अच्छा वारिस बनेगा ?और उसके बाद सबकी सलाह से शांतनु कर दिया |
तो देखा मेरे दोस्तों आपने की कैसे एक आइना ने सही फैसला सुनाया और जो आपकी सफलता हैं वो आपके स्वाभाव से भी झलकती हैं। आपको ये कहना चाहिए की आप कौन हैं और खुद से ही सवाल करना चाहिए ? और आपको ये जानना चाहिए की आप दुनिया के अलग इंसान हैं |
तो बिना किसी डर या ग्लानि के आपको अपने अंदर के अपने उस अच्छी चीज़ को उभारना हैं और अपनी गलतियों को भी देखना हैं और हर परिस्थिति देखने का अपने नज़रिया बदले और उसमें हमेशा अपना हित ढूंढे और अपना अहित कभी न ढूंढे |
आशा हैं की आप लोगों को मेरा ब्लॉग पसंद आएगा |
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