"कड़वे सच जिंदगी के दोस्तों को लेकर "

आप सभी को मेरा प्रणाम मैं हूँ आपकी दोस्त और एक पथप्रदर्शक जो खुद की लिखी हुई कहानियों से  सबको प्रेरणा देने के प्रयास में हूँ | तो चलिए शुरू करते हैं | तो शीर्षक देखके पता लग ही गया होगा की आज जिस बारें में बात कर रहे हैं वो जुड़ा हुआ हैं दोस्ती से....... 

तो चलिए अब मैं आपको बताती हूँ की क्या होते हैं कड़वे सच दोस्ती के ,क्या किरदार हैं एक अच्छे दोस्त हमारी जिंदगी में और कैसे वो हमारी जिंदगी को अच्छा बनाते हैं तो इसके बारें में हम नीचे वाले पंक्तियों में पढ़ेंगे |  




                                    

और यहाँ पैन ये भी पढ़ेंगे की असल में सच्ची दोस्ती क्या होती हैं | और कैसे मैंने ये अपने जीवन से अनुभव किया की दोस्तों की जरुरत क्यों होती हैं जिंदगी में | आपको तो पता होगा की दोस्त जिंदगी  की तरह होते हैं जिसमें बहुत ज्यादा खुसबू होती हैं और हमेशा वो प्यार ,दयालु ,मस्ती ,बाँट के खाना ,चिंता और भी बहुत कुछ हमें महसूस होता हैं | 

मुश्किल समय  दोस्त एक दवाई की तरह हमें सहारा देते हैं जिनका जो स्वाद रहता हैं वो कड़वा रहता हैं पर वो हमेशा हमें  दिखाता हैं | चाहे परिस्थिति जैसे भी हो | 

तो दोस्तों आज हम जानने वाले हैं हमारी एक कहानी के बारें  में जो मेरे दोस्तों से जुड़ी हुई हैं और उनके गलत बातों से मुझे आज भी दुःख होता हैं और उनके कारण मेरे दिल पैन वो बात काटों की जैसे चुभ रही हैं | और यह बात मुझे हमेशा भावुक कर देती हैं लेकिन हमेशा मुझे मेरी माँ सहारा देती हैं और बहुत ही मुश्किल हालातों में वो मेरे साथ खड़ी रहती हैं | 



तो आगे जाने से पहले जानतें हैं की आखिर दोस्त होना  क्यों इत्ता जरुरी हैं जिंदगी में ?

आखिर क्यों हैं दोस्त की जरुरत जिंदगी में ?

जब आप अपने दोस्तों के साथ रहते हैं तो आप अपने सारे राज़ उनके साथ बाँट सकते हैं और अपनी खुसी का हिस्सा उन्हें भी बना लेते हैं | वो आपको हमेशा समझेंगे और हमेशा आपको सही रास्ता दिखाएंगे | 

आप उन्हें ऐसे ऐसे बात भी बता सकते हो जो आपने अपने घरवालों को भी नहीं बताया | सच्चा दोस्त वही  होता हैं जो हमेशा आपकी मदद करने के लिए उपस्थित हो और सबसे अच्छा समय तब होता हैं जब वह दोस्त आपके लिए इन्तिज़ार करे और हमेशा आपके साथ हर लम्हा बिताएं | 

तो उनके आने से आपकी जिंदगी में बहार आ जाती हैं और आपका जीवन हमेशा हरा भरा रहता हैं जिनको ऊपर आप बहुत अच्छे से विश्वास कर सकते हो | 

पर कभी कभी कभी क्या होता हैं की आप ऐसे लोगों लेते हैं जो सामने आपसे अच्छे से बात करने का दिखावा करते हैं और पीठ पीछे बुराई करते हैं तो आपको हमेशा ऐसे लोगों से बच कर रहना चाहिए | 





तो चलिए शुरू करते हैं कहानी को अब बारी आती हैं की आप लोगों को पता चले की किन लोगों से चाहिए और किन लोगों से नही | 

शुरू करते हैं..... 

ये बहुत समय पहले की बात हैं | जब ज्यादा टेक्नोलॉजी का विकास नहीं हुआ था और ज्यादातर लोग साईकिल और पैदल चलके ही यहां वहा जाया करते थे | बहुत काम ही गाडी और मोटरसाइकिल दिखा करती थी रास्तें पे | उस समय एक स्कूल में बहुत सारे बच्चे पढ़ते थे | जिसमें से पांच लडकियां बहुत अच्छी दोस्त थी | उनमें बहुत ही ज्यादा मित्रता थी | 

जैसे जैसे समय बीत रहा था वो लोग बड़े हो गई और शहर के स्कूलों में दाखिला ले लिया | क्योकि गांव में स्कूल सिर्फ पांचवी तक था | पर शहर जाने पर भी उन लोगों ने दोस्ती नहीं तोड़ी और साथ ही  पढ़ रहे थे | अब उन पाँचों में चार लड़कियां ऐसे थी जो बहुत अच्छी दोस्त थी पर पांचवी वाली उनके लिए एक कठपुतली के सामान थी | 

हमेशा वो चार लोग उस पांचवी लड़की को ये जताते थे  की वो उनकी दोस्त हैं पर असल में वो उससे काम कराया करते थे | जैसे की वे सब उसे कहते की हमारा बस्ता उठा दो ,हमारा  गृहकार्य कर दो और भी बहुत सारे काम करवाते | पांचवी वाली को बुरा बहुत लगता था ,पर वो दोस्ती के नाते अपने दोस्तों को कुछ भी नहीं बोलती थी | 

और हमेशा वो लोग अपने स्कूल पैदल जाया करते थे जिसकी वजह से उन्हें स्कूल  हमेशा दंड मिलता था तो उन्होंने सोचा की एक वाहन कर ली जाएँ |  अब बारी थी वाहन से स्कूल जाने की | 

तो वाहन में वो लोग हमेशा पीछे वाले में बैठते थे और पांचवी वाली को हमेशा आगे बैठा देते थे | हमेशा पांचवी वाली सारी चीज़ों को टाल देती थी | और ये सारी चीज़ें ३-४ दिन तक होता हैं | और चौथे दिन वो लड़की बोलती हैं की मुझे भी पीछे बैठना हैं तुम लोगों के साथ | पर वो सारे उसे मना  कर देते हैं और उसे खरी खोटी सुनाते हैं | 

उसके बाद उसे बाद में समझ आगया की दोस्तों का असली मतलब कुछ और ही होता हैं | ऐसे दोस्त भी किस काम के जो स्वार्थ को पूरा करने के लिए दोस्ती निभाएं | और उसे बात समझ आ गयी | उसने तुरंत ही उन चारों से दोस्ती तोड़ दी | 



तो दोस्तों इस कहानी से आप समझ गए होंगे की दोस्तों का असली मतलब क्या होता हैं और कौन हैं हक़दार दोस्ती का |  दोस्त वो होता हैं जो आपको परेशानी से निकालें न की आप के लिए परेशानी बढ़ाएं | वह मुसीबत में आपका हाथ थामें और हमेशा आपके लिए तैयार रहे | ये जो ऊपर कहानी हैं उसका सारांश ही यही हैं की अपने आपको व्यर्थ न समझे और वह दोस्त ही कैसा  जो आपकी इज़्ज़त ही न करे | 

आशा हैं आप सभी को मेरी कहानी पसंद आयी होगी |और हमेशा ये याद रखे की जैसी ही सांगत मिलेगी वैसे ही आप बनेंगे | इसलिए ये आपके ऊपर हैं की अच्छी संगत बनाएं और आपको अच्छे दोस्त मिलेंगे | ऐसे ही मोटिवेटिंग विचारों के लिए हमारे ब्लॉग को  फॉलो करे और नीचे दिए हुए लिंक को दबायें | 

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