आप सभी को मेरा प्रणाम !!!मैं आपकी दोस्त रानी 💖💖लेके फिर हाज़िर हाज़िर हूँ एक बात बताने के लिए जो हर कोई आपको नहीं बताएगा | तो आइये जानना शुरू करते हैं की लोग कभी कभी हारते ही क्यों रहते हैं |
असल में इसकी वजह कही न कही हम खुद जो अपने अंदर छुपे एक सफल व्यक्तित्व को देखने में असमर्थ होते हैं | हम सारे सपनो को अनुभव कर पातें वो भी रात में पर असल जिंदगी में अफ़सोस उसे जीते हैं पर अनुभव नहीं कर पातें !!!
असल में बात हैं की जिस चीज़ हैं को हम चाहते हैं हम उसे करना तो शुरू कर देते हैं पर उसके परिणाम ,उससे मिलने वाली सक्सेस के बारें में बहुत काम जानते जिसकी वजह से कही न कही हमारी मेहनत में कमी रह जाती हैं |
सफल होने के लिए दो स्तम्भों की आवश्यकता पढ़ती हैं और वो हैं विश्वास और धैर्य | दोनों ही साथ में आवश्यक हैं किसी एक के न होने से कार्य में परेशानी हैं | 👍👍👍
हमें रोज़ विश्वास जगाना होगा की जो कार्य हम कर रहे हैं उसमें जीत अवश्य ही मिलेगी | जैसे खिलाडी अगर उग्र स्वाभाव से खेले तो वह कही न कही हार जाता हैं | परन्तु वही अगर वो कूल स्वाभाव से खेले तो वो जीत जाता हैं इसलिए धैर्य अति आवश्यक हैं!!
और आखिर में सबसे बड़ी बात की फल की चिंता न कीजिये कभी भी सिर्फ कर्म करते रहिये फल आपको अपने आप मिलेगा !!और हमेशा खिलाडी के जैसा ही अपना मनोभाव बनाइये तब जाके आपको निश्चित तौर पर सफलता अवश्य मिलेगी | 👆👆👆
मेरी स्वलिखित एक जज़्बा स्टोरी
तो आइये दोस्तों शुरू करते हैं एक प्रेरणाप्रद स्टोरी से जो आप सभी को एक सीख देके जाएगी| तो शुरू करते हैं बिना किसी देरी के | ये बात उस समय की हैं जब एक छोटा सा गांव था | जहा पर एक छोटा सा परिवार हुआ करता था| जो ज्यादा सुखी तो नहीं था पर खुश रहता था|
उस परिवार में चार सदस्य थे | जिसमें एक लड़का,उसकी बहिन,माता पिता रहा करते थे | वह लड़का हमेशा अपने पिता की मदद चाहता था | घर का पालन पोषण करने के लिए वह लड़का बहुत प्रयास करता था दिन रात म्हणत करता था|
सुबह ६ बजे से ही दूध बेचने निकल पड़ता था और फिर ९ से रात १० बजे तक काम करके वह अपने पिता और बहन केलिए कुछ जुटा पाता था | पर अभी भी वो बहुत कम कमाता था | अपनी साईकिल लेकर ढालांगों से लड़कर अपने काम पर जाता था |
पर घर के खर्च को पूरा करने के लिए उसने अपना साईकिल बेच दिया जिसकी वजह से उसके काम पैन जाने का साधन भी चला गया |पर उसने हार नहीं मानी | हर बार वह यही सोचता था की घर का खर्च चलाने के लिए अभी और पैसे चाहिए| इसी बीच उसके पिता भी बीमार पढ़ गए और साड़ी जिम्मेदारी लड़के के ऊपर आ गयी |
परन्तु जब एक बार वह दूध बेचने जाता हैं तो वह अखबार खरीदता हैं शायद उसे अखबार की वजह से बेहतर नौकरी मिल जाये | जिसमें वह ये पाता हैं की एक दौड़ प्रतियोगिता हैं जिसमें जितने वाले को एक साईकिल और साथ में ५०,०००/- रुपए मिलेंगे|
तो वह ये सोचने लगा की वह तो कित्तेन बड़े बड़े खिलाडी आएंगे और में कैसे जीत पाऊंगा | वह हिम्मत हार रहा था|
परन्तु जब उसने अपने पिता को देखा तो उसने फिर से हिम्मत जुटाई |
पर अब उसके सोचने का नजरिया बदल चूका था अब वो अपने पिता का सही ईलाज और बहिन को आगे पढाने के सोच रहा था |
प्रतियोगिता होने में सिर्फ दो तीन महीना बाकी था और उसने यह प्रण लिया था की वह भले ही जीतेगा या नहीं पर अपनी तरफ से १०० प्रतिशत देगा | उसके सोच के अनुसार वह रोज़ सुबह ४ बजे निकल पड़ता हैं और साईकिल न होने के बावजूद एक किलोमीटर पैदल चलकर ४:३० से ५:३० तक एक घंटा रोज़ दौड़ का अभ्यास करता हैं | बाकि बच्चे दौड़ने के लिए पैसे देकर ट्रैनिग ले रहे होते हैं परन्तु आर्थिक तंगी के कारन वह शिक्षण भी नहीं ले सकता |
जैसा की समयनुसार २-३ महीने बाद प्रतियोगिता थी और समय आ गया था | उसके बाद वह प्रतियोगिता स्थल पे पंहुचा और उसके पास नए जूते भी नहीं थे | परन्तु वह सिर्फ अपने पिता,माँ और बहिन के बारें में ही सोच रहा था और नंगे पेअर ही भाग लेने हेतु चल दिया | जैसे ही प्रतियोगिता शुरू हुई अपना कस के जोर लगाते हुए भागा|
परन्तु बीच में नंगे पेअर में काँटा चुभ गया और वह गिरने वाला होता हैं की पिता का दृश्य सामने आता हैं | और वह फिर से हिम्मत करके भागने लगता हैं| अंत में लड़के की जीत होती हैं | और उसके पिता को उस पर बहुत गर्व होता हैं| और इसी तरह यह कहानी समाप्त हो जाती हैं |
सीख
दोस्तों हमें सिर्फ अपने लक्ष्य पैन फोकस करना चाहिए नाकि अपने फल पैन | अगर आपकी १०० प्रतिशत मेहनत हैं तो सफलता आपको जरूर मिलेगी | दोस्तों इसलिए लक्ष्य के प्रति हमेशा अपनी सोच पॉजिटिव रखे |
आपने चींटी की कहानी तो सुनी होगी जिसमें वो अत्यंत मेहनत करती हैं दिवार पैन चढ़ने के लिए लेकिन अंत तक हार मानती | इसलिए आप लोग भी जीवन में कभी हार न माने | कहते हैं न जो मन से हार जाता हैं वो कभी नहीं जीत सकता | जिंदगी में मुश्किलें तो हैं तो क्या हम चलना छोड़ दे क्या ?
नहीं अगर ऐसे ही सोच रखेंगे तो आगे बढ़ पाएंगे | इसलिए जीवन लक्ष्य को साधना ही परम सुख की अनुभूति को उत्पन्न करता हैं मेरे दोस्त | अपने जीवन का एक लक्ष्य होना चाहिए जिसको पाने के आप संघर्ष करो | नाकि फालतू टाइम पास |
और इसमें सबसे बड़ा धन होता हैं समय | समय से ज्यादा मूल्यवान कोई नहीं हैं इस संसार में | इसलिए समय रहते ही अपना लक्ष्य चुने और अपना कर्म करे |
आशा हैं मेरा यह खुलासा आपको पसंद आएगा और आप सब इसी नियम को आपनायेंगे और अपने जिंदगी में ऊचाईओं तक पहुंचेंगे | 😇😇😇😇
यहां दबाएं