छोटी कहानी -"काम से मिलने वाली चाबी "

 आप सभी को सुब्प्रभात सुब्रतरि या फिर गुड  इवनिंग!!!! मैं हूँ आपकी दोस्त रानी!👇👇

तो कैसे हैं आप लोग बढ़िया ही होंगे|  जहा तक मैं जानती  हूँ दुखी होने के बहुत सारे कारण होते हैं पर खुश होने के भी होते हैं तो अगर आप उदास हैं तो खुश होजाईये क्योकि दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जिनके पास खुश होने वजह नहीं होती क्योकि उनको अपनी दो वक़्त की रोटी का इंतिज़ाम करना पढता हैं  |

 तो आईये सुनते हैं इससे जुडी हुए एक कहानी जो हमे यह प्रेरणा देगी की दुनिया में खुश होने से बड़ा कोई उपहार नहीं हैं क्योकि किसी के आने या जाने से कोई फर्क नहीं पढ़ना चाहिए | दुःख तो होता हैं पर संभालना  आना चाहिए | 



दोस्तों दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं कुछ लोग काम करने में अत्यंत सक्षम होते हैं और कुछ आलस से भरे रहते हैं | पर कुछ लोग तो सक्षम भी नहीं होते और आलस भी कम आता हैं | परन्तु हमें काम को भार समझ कर नहीं करना चाहिए अत्यंत उसे आनंदपूर्ण ढंग  से करना चाहिए | 

काम करने का आनंद तब लिया जा सकता हैं जब काम करने वाला उसे अच्छे ढंग से करे और जिस कारन से कर रहे हैं उसे एकदम ईमानदारी से करना चाहिए | कभी कभी लोग असंतुष्ट इसलिए रह जाते हैं क्योकि वह काम की अधिकता को ज्यादा देखते हैं काम से मिलने वाली सफलता को नहीं | 

२. दूसरी बात ये  हैं की आप जो काम  हैं उसे आपको  प्रसन्नता होनी चाहिए इसलिए ये अत्यंत जरुरी हैं| तो ये बात  जब मैं छोटी थी तब भोजनालय में मैंने सेवा दी थी खाना परोसा था लोगो को और सच बताऊ तो मुझे बहुत खुसी हुई थी लोगो को खाना खिलाकर| और मैंने एक कुत्तों को भी खाना खिलाया था | 

मेरी खुद एक्सपीरियंस की गयी स्टोरी 



. तो चलिए शुरू करते हैं बिना किसी देरी की मेरी खुद जो कहानी मैंने एक्सपीरियंस की हैं जिससे मुझे करने पर बहुत ज्यादा खुसी हैं | तो ये बात तबकी हैं जब हम छोटे थे | हमारे टीचर ने हमें एक कार्य दिया था की आप  प्यासे लोगों को पानी पिलाना हैं और हमने ऐसा ही किया| 

मंदिर के सामने शरणार्थियों की बहुत ज्यादा भीड़ होती हैं तो जब हमने पानी उन सभी प्यासे लोगों को पानी पिलाया तो उन्होंने हमें अच्छा अच्छा आशीर्वाद दिया और जिससे मेरे मन को अत्यंत सटिस्फैक्शन मिला क्योकि जब आप कोई काम निश्वार्थ भाव से करते हो तब आपको उसका परिणाम भी अच्छा ही मिलता हैं | 

२. तो दोस्तों दूसरी बात ये हैं हमारे कर्म  जो हम करते हैं उनसे हमारे जीवन में बहुत से फर्क पड़ते हैं | क्योकि जो हम करते हैं वो दोबारा हमारे पास लौटके आता ही आता हैं | इसलिए हमारे किये हुए कर्म हमारी निजी जिंदगी पर प्रभाव डालता ही डालता हैं| 

तो मैं आप लोगों को बात बताने जा रही हु जिसमें मैं येन जिक्र करूंगी की मुझे जो मेरे काम करने के बाद फल मिलता हैं वो अत्यंत ही अच्छा और मीठा होता हैं |  मतलब की मैं जो काम करती हूँ उसका परिणाम मुझे जब मिला तो बहुत ही खुसी हुयी और आनंद भी मिला | 

तो ये कहानी शुरू होती हैं जब हम बचपन में अपने क्लास के बच्चों के साथ घूमने गए थे और हम सभी  थे की हम वह पैन जायेंगे तब खाना बनाएंगे| खाना बनाएंगे और बहुत सारी मस्ती करेंगे| 

और जो की हमारा लोकेशन तालाब के पास था तो ये भी सोचा था जाके नहाएंगे| और फिर क्या था हमारे क्लास के सारे बच्चे बस में बैठकर निकल पड़ें | बहुत सारे गाने गायें हमने बस में और अंताक्षरी खेली| वह पैन भी हमारे टीचर हमें मस्ती करने से नहीं रोक रहे थे | 

वो पल भी बहुत अच्छा था| अब फिर हम लोकेशन के हिसाब से उस जगह पैन पहुंच गए जहा हमें पहुंचना था | अब बारी थी आस पास की जगह का लुफ्त उठाने की तो सारे टीचर्स निकल गए | अब हम सबको भूख लगरी थी तो जो खाना हम घर से लाएं थे वो सारा ख़त्म नहीं हो पाया था | 

अब मेरे पास बहुत सारा केला भी था और बहुत सारा बहुत सारे फ्रूट्स भी थे| तो मैंने सोचा की कभी कभी कुछ कुछ चीज़ों को जरुरतमंदो को भी दे देनी चाहिए उससे वह बहुत खुश होते हैं और उनकी बोली हुई दुआएं  कभी खली नहीं जाती हैं | 

अब मैंने अपने बैग में से तीन-चार केले निकालकर  बंदरों की मस्तीखोर टोलियों को दे दिया| और कुछ भिखारी भी थे तो उनको भी दे दिया और उनको खता देख मुझे संतोष हुआ और उनके प्रति सहनुभूति का भाव आया| इसलिए दोस्तों कोई भी काम को छोटा बड़ा न समझे उसको एकदम अच्छे भाव से करे | 



कहानी का शीर्षक हैं -काम से मिलने वाली चाबी| 

कुछ समय पहले की बात हैं एक राज्य में एक राजा हुआ करता था वह बहुत दुखी था उसे अपने दुखी होने का राज जानना था उससे रात भर नींद नहीं आती थी और दिन में भी वह उदास ही रहता था | तो उसे अब इक्छा जगी की वह अपने उदासी का कारन जानके रहेगा | 

तब गांव का निरक्षण करते वक़्त उसने एक कुटिया देखी जिसमें एक बच्चा अपने पिता के साथ हस्ते हस्ते खेल रहा रहा |तभी राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ की इसकी तरह मैं खुश क्यों नहीं हु बल्कि मैं उससे ज्यादा आमिर हु परन्तु तो पर भी मैं दुखी हूँ | 

तभी राजा ने निश्चय किया की वह इसका पता लगाएंगे | उसके बाद राजा ने उस गरीब के घर में खज़ाना गाड़ दिया | सुबह उठकर गरीब पिता ने देखा की उसके जमीं में खज़ाना गड़ा हुआ हैं | फिर क्या था उसी रात से गरीब पिता अच्छे से सोया नहीं क्योकि जीतता वो कमाता था उससे उत्ते में संतुष्टि नहीं थी उसे और चाहिए था | 

इसलिए और की चिंता  में आज बर्बाद नहीं करना चाहिए मेरे प्यारे दोस्तों | इसलिए श्रम करो और संतुष्ट रहो नाकि दुखी होकर जीवन व्यतीत करो | तो इससे यह शिक्षा मिलती हैं की जीतता भी हैं उत्ते में ही खुश रहो यह सारी  बात जानकर राजा भी समझ जाता हैं और हमेशा खुश रहता हैं 😇😇



बाई बाई ऐसे ही मिलेनेगे बहुत सारी कहानियों के साथ प्यारे साथियो!!!😊

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