मोटिवेशनल ब्लॉग इन हिंदी !!!कितना महत्व रखता हैं मोटिवेशन या कुछ कर गुजरने का जूनून | उसे हम आंक तो नहीं सकते पर है उसे हम समझके सही ढंग से प्रयोग में अवश्य ला सकते हैं | और हमारे अंदर विश्वास रखने की छमता हैं व्ही हमारे लिए बहुत ही ज्यादा प्रेरणा दायी हैं |
हमें कभी भी अपने आपको किसी से कमजोर नहीं समझना चाहिए और जहाँ तक हो सके हमें खुद पर विश्वास करना चाहिए | कभी कभी क्या होता हैं की लोग छोटे मोठे समस्या से डर जाते हैं और उससे भागने लगते हैं |
तो दोस्तों एक बात ध्यान रखे की आप जिस चीज़ से जितना भागेंगे वो चीज़ आपको उतना ही परेशान करेगी | इसलिए हमेशा अपनी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश चाहिए वो भी पूरी मेहनत से |
आप सही जगह आये हैं जहा में आपको बताउंगी अपनी आपबीती एक मोटिवेशनल एक्सपीरियंस जो शायद सबको ही अपने जिंदगी में एक बार होता ही होता हैं | बस फर्क इतना हैं की कुछ पहचान जातें हैं और कुछ जानके भी अनजान बने रहना चाहते हैं | तो आईये दोस्तों शुरू करते हैं बिना किसी देरी के अपने शीर्षक के ऊपर लिखना !!!!
सेल्फ मोटिवेशन का असल मतलब क्या हैं ?
तो सेल्फ मोटिवेशन का असल मतलब हैं की अपने अंदर कुछ अच्छा करने का इच्छा जाग्रत करना | किसी और के कारन जबरन नहीं ,वरन अपने अंदर इन सारी अच्छी इच्छाओ को सोचना और उसे नियमितता के साथ एक के बाद एक करना बिना थके हुए | |असफलता का एक कारन ये भी हो सकता हैं की आप उस काम को एक बोझ समझ कर कर रहे हो इसलिए हर काम को कर्मठता से और बिना किसी उलझन के करना चाहिए |
हर कदम पर कठिनाई तो मिलेगी पर इसका ये मतलब थोड़ी न हैं की रास्ता ही छोड़ देंगे | पर एक बात सच्ची हैं की इन सबको करने का साहस और सामर्थ्य वो कही न कही हर व्यक्ति के अंदर ही छुपा हैं | तो आइये आपको मैं सुनती हूँ अपनी आपबीत्ती जो मेरे साथ घटना भी कुछ इस प्रकार हुई थी जिसे मैं अपने जीवन का एक सबक मानती हूँ |
और सायद आप भी अपने जीवन में होने वाली हर घटना से सबक ले सके और उससे कुछ होने वाली गलती से हमेशा सबक ले |
मेरी आपबीती कहानी !!!!
तो ये बात तबकी हैं जब मैं छोटी थी | तक़रीबन ६-७ साल की होंगी तब ये घटना मेरे साथ हुई थी और ये कोई सीरियस घटना नहीं थी |पर इससे मुझे बहुत ही ज्यादा सिख मिली हैं और मेरे जीवन में इस घटना का बहुत बड़ा योगदान हैं | तो ये बात हैं ३-४ क्लास में थी | तब मेरे क्लास में एक टीचर थी जो हमारे आने वाले पेपर के लिए हम लोगों को तैयार कर रही थी |
तब मेरा एक टेस्ट हुआ था वो साइंस का रीविशन टेस्ट था और फाइनल होना बाकी था | तब मैंने रात भर पढ़ाई की थी की मेरे अच्छे मार्क्स आएं |तब सारे बच्चे प्रिपरेशन करके आये थे और मुझे पूरा यकीन था की मैं सारे जवाब अच्छे से दे दूंगी |
पर न जाने क्या हुआ मैं जवाब आते हुए भी सवाल का जवाब देने के लिए हाथ नहीं उठा पायी थी | और बोलने ही नहीं हो पाया मुझसे अपने ऊपर शंका थी की जो मैं बोल रही हूँ वो सही होगा या नही | उसके बाद घर आने के बाद मुझे बहुत दुःख हुआ की मैं जवाब आने के बाद भी जवाब नहीं दे पायी | और मेरा विश्वास पूरा ही टूट चूका था मैं अपना विश्वास अपने ऊपर से खोती जा रही थी |
फिर मेरी माँ ने मुझे समझाया की "परिस्तिथियाँ तो जरुरी नहीं की हमारे अनुकूल ही हूँ ,हमें हमारे सामर्थ्य को उन परिस्तिथियों से नहीं आंकना चाहिए |"फिर इस कथन से मेरे अंदर बहुत ही ज्यादा हिम्मत आयी,मैंने खुस से साहस को समेटा और मैं फिर से लग गयी तैयारी में | उसके बाद में फाइनल में मैंने सारे सवाल का जवाब दिया | और सब ने मेरी तारीफ की। ...
ऐसे ही कई लोग अपने शरीर के शेप से परेशान रहते हैं ,कुछ लोग अपने काले रंग से परेशान रहते हैं और कयी तो अपनी हाइट से परेशान रहते हैं जिनकी वजह बहार नहीं जा पातें | और बहार निकलते हैं तो कटे कटे रहते हैं | अपनी सलाह भी किसी के सामने व्यक्त नहीं कर पातें और हमेशा गुमशुम से रहते हैं |
यह मतलब यह हैं की उनको अपने ऊपर विश्वास ही नहीं हैं की वो भी बहुत कुछ कर सकते हैं क्यों क्योकि वो कही न कही किसी चीज़ में कमजोर हैं वो लोग | पर दोस्तों आप लोगों को इसे अपनी ताकत बनानी हैं न की अपना डर और अपने अंदर हौसला कायम करना हैं की में वो सारी चीज़ें कर सकता हूँ जो एक आम इंसान कर सकते हैं |
तो ऊपर वाली कहानी से आप लोगों को बहुत ही ज्यादा शिक्षा मिला होगा | तो इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती हैं की हमे हमेशा खुद पे विश्वास करना चाहिए और बिना हिचकिचाहट के हर कार्य करना चाहिए | संकोच छोड़ना ही सक्सेस की पहली निशानी होती हैं मेरे दोस्त |
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